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बिना जरूरत 5 लाख की पुलिया! मरवाही में तकनीकी स्वीकृति पर उठे गंभीर सवाल, इंजीनियर-एसडीओ घेरे में”

“बिना जरूरत 5 लाख की पुलिया! मरवाही में तकनीकी स्वीकृति पर उठे गंभीर सवाल, इंजीनियर-एसडीओ घेरे में”

मरवाही जनपद में 15वें वित्त की राशि पर बड़ा सवाल: जहां पुलिया की जरूरत नहीं, वहां 5 लाख का निर्माण प्रस्ताव! इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध?

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मरवाही। जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत नरौर में 15वें वित्त आयोग मद से लगभग 5 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित पुलिया निर्माण का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस स्थान पर पुलिया निर्माण कराया जा रहा था, वहां पहले से ही आसपास पुल मौजूद होने की बात सामने आने के बाद पूरे प्रकरण पर सवाल उठ रहे हैं।

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जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद संबंधित इंजीनियर अश्वनी पांडेय ने स्टीमेट तैयार किया। इसके बाद एसडीओ ने तकनीकी स्वीकृति (TS) प्रदान की और इंजीनियर ने ले-आउट कराकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया।

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निर्माण शुरू होने के बाद शिकायत मिली कि जिस स्थान पर पुलिया बनाई जा रही है, वहां पहले से ही ऊपर और नीचे की ओर पुल बने हुए हैं तथा नई पुलिया की आवश्यकता नहीं है। शिकायत के बाद RES एसडीओ स्वयं स्थल निरीक्षण के लिए पहुंचे।

एसडीओ ने भी शिकायत को सही मानते हुए कहा कि, “जिस स्थान पर पुलिया निर्माण कराया जा रहा था, वहां पुलिया की आवश्यकता नहीं है। फिलहाल निर्माण कार्य बंद करा दिया गया है।”

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एसडीओ स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि उस स्थान पर पुलिया की आवश्यकता नहीं थी, तो तकनीकी स्वीकृति (TS) किस आधार पर दी गई? यदि स्थल उपयुक्त नहीं था, तो स्टीमेट तैयार करने और ले-आउट कराने का आधार क्या था?

इस पूरे मामले में संबंधित इंजीनियर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि तकनीकी परीक्षण सही तरीके से किया गया था, तो अनावश्यक स्थान पर निर्माण की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई? और यदि परीक्षण में चूक हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? यह मामला तकनीकी परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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